श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.25.63 
কে কাহার বাপ, প্রভু, কে কার নন্দন
সবে আপানার কর্ম করযে ভুঞ্জন
के काहार बाप, प्रभु, के कार नन्दन
सबे आपानार कर्म करये भुञ्जन
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु, कौन किसी का पिता है और कौन किसी का पुत्र? हर कोई अपने कर्मों का फल भोगता है।"
 
"O Lord, who is someone's father and who is someone's son? Everyone suffers the consequences of his actions."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)