श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.25.60 
শিশু বলে,—“এ দেহেতে যতেক দিবস
নির্বন্ধ আছিল ভুঞ্জিলাঙ সেই রস
शिशु बले,—“ए देहेते यतेक दिवस
निर्बन्ध आछिल भुञ्जिलाङ सेइ रस
 
 
अनुवाद
बालक ने कहा, "जब तक मुझे इस शरीर में रहना था, तब तक मैं रहा और आनंद उठाया।"
 
The boy said, "I lived and enjoyed myself as long as I had to in this body."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)