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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन
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श्लोक 54
श्लोक
2.25.54
নাহি জানি কি পরমাদ পডযে কখন
অন্যোঽন্যে চিন্তযে সকল ভক্ত-গণ
नाहि जानि कि परमाद पडये कखन
अन्योऽन्ये चिन्तये सकल भक्त-गण
अनुवाद
भक्तों ने आपस में विचार-विमर्श किया, लेकिन वे समझ नहीं पा रहे थे कि ऐसी विपत्ति कब आएगी।
The devotees discussed among themselves, but they could not understand when such a calamity would occur.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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