श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.25.52 
“পুত্র-শোক না জানিল যে মোহার প্রেমে
হেন সব সঙ্গ মুঞি ছাডিব কেমনে”
“पुत्र-शोक ना जानिल ये मोहार प्रेमे
हेन सब सङ्ग मुञि छाडिब केमने”
 
 
अनुवाद
“मैं उस व्यक्ति का साथ कैसे छोड़ सकता हूँ जिसने मेरे प्रति प्रेम के कारण अपने पुत्र के लिए विलाप नहीं किया?”
 
“How can I leave the side of someone who did not mourn for his son because of his love for me?”
तात्पर्य
घर के किसी सदस्य को विपत्ति आने पर घर वाले विलाप से व्याकुल हो जाते हैं। फिर भी अपने सबसे प्यारे बेटे से बिछुड़ने पर पैदा हुए विलाप से भी श्रीवास को विचलित नहीं किया जा सका क्योंकि वे परम प्रभु की संगति में थे। इसलिए प्रभु के भक्तों को भौतिक पदार्थों का उत्पाद नहीं माना जाता या साधारण लोगों के बीच नहीं गिना जाता। जो कृष्ण के प्रति प्रेम में डूबा रहता है उसके लिए उनके अतिरिक्त किसी और वस्तु के प्रति प्रेम होना संभव नहीं होता। नवद्वीप में श्री गौरासुन्दर के प्रधान मित्र, श्रीवास पंडित के द्वारा प्रेम का बेजोड़ नमूना देखकर प्रभु को उनकी संगति छोड़कर कहीं और जाने की इच्छा नहीं हुई।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)