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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन
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श्लोक 43
श्लोक
2.25.43
সর্বজ্ঞের চূডামণি শ্রী-গৌরসুন্দর
জিজ্ঞাসেন প্রভু সর্ব-জনের অন্তর
सर्वज्ञेर चूडामणि श्री-गौरसुन्दर
जिज्ञासेन प्रभु सर्व-जनेर अन्तर
अनुवाद
सर्वज्ञ पुरुषों के शिरोमणि श्री गौरसुन्दर ने वहाँ उपस्थित सभी लोगों के समक्ष एक प्रश्न रखा।
Shri Gaursundar, the crown jewel of all knowledgeable men, posed a question to all the people present there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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