श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.25.34 
যদি বা সṁসার-ধর্মে নারঽ সম্বরিতে
বিলম্বে কান্দিহ, যার যেই লয চিত্তে
यदि वा सꣳसार-धर्मे नारऽ सम्वरिते
विलम्बे कान्दिह, यार येइ लय चित्ते
 
 
अनुवाद
“यदि आप इन पारिवारिक भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो कम से कम बाद में अपनी संतुष्टि के लिए रो लें।
 
“If you can’t control these family emotions, at least cry to your satisfaction later.
तात्पर्य
सांसारिक विचारों के अनुसार तो भौतिकवादी लोग पुत्र के मृत्यु की खबर पाकर व्याकुल होकर रोते देखे जाते हैं। यह विचार करते हुए कि इस प्रकार के लौकिक आचरण से नाचते-गाते भगवान के हर्ष के भाव में बाधा आएगी, श्रीवास ने थोड़ी देर के लिए इस प्रकार के लौकिक भावों के स्थगित करने की शिक्षा दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)