श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.25.23 
কি কহিব শ্রীবাসের ভাগ্যের মহিমাযাঙ্র
দাস-দাসীর ভাগ্যের নাহি সীমা
कि कहिब श्रीवासेर भाग्येर महिमायाङ्र
दास-दासीर भाग्येर नाहि सीमा
 
 
अनुवाद
मैं श्रीवास के सौभाग्य का वर्णन करने में असमर्थ हूँ। उनके दास-दासियों के सौभाग्य का भी कोई अंत नहीं है।
 
I am unable to describe the good fortune of Srivasa. The good fortune of his servants is also boundless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)