श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.25.13 
সারি করিঽ চতুর্-দিগে এডে কুম্ভ-গণ
দেখিযা সন্তোষ বড শ্রী-শচী-নন্দন
सारि करिऽ चतुर्-दिगे एडे कुम्भ-गण
देखिया सन्तोष बड श्री-शची-नन्दन
 
 
अनुवाद
उसने चारों ओर जल के कलश पंक्तियों में रख दिए। यह देखकर श्रीशचीनन्दन अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
He placed water pots in rows all around. Seeing this, Sri Sachinandan was extremely pleased.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)