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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 94
श्लोक
2.24.94
অবধূত করিল সকল জাতি-নাশ
কোথা হৈতে মদ্যপের হৈল পরকাশ”
अवधूत करिल सकल जाति-नाश
कोथा हैते मद्यपेर हैल परकाश”
अनुवाद
"इस अवधूत ने सबकी जाति बिगाड़ दी है। पता नहीं यह शराबी कहाँ से आ गया है।"
"This Avdhoot has ruined everyone's caste. I don't know where this drunkard has come from."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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