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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 61
श्लोक
2.24.61
প্রভু বলে,—“উঠ নিত্যানন্দ, মোর প্রাণ
তুমি সে জানহ মোর সকল আখ্যান
प्रभु बले,—“उठ नित्यानन्द, मोर प्राण
तुमि से जानह मोर सकल आख्यान
अनुवाद
भगवान ने कहा, "उठो, नित्यानंद! तुम मेरे प्राण हो। तुम मेरे बारे में सब कुछ जानते हो।"
The Lord said, "Get up, Nityananda! You are my life. You know everything about me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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