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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 60
श्लोक
2.24.60
অনন্ত-ব্রহ্মাণ্ড-রূপ নিত্যানন্দ দেখিঽ
দণ্ডবত্ হৈযা পডিলা বুজিঽ আঙ্খি
अनन्त-ब्रह्माण्ड-रूप नित्यानन्द देखिऽ
दण्डवत् हैया पडिला बुजिऽ आङ्खि
अनुवाद
जब नित्यानन्द ने भगवान के असंख्य ब्रह्माण्डों से युक्त रूप को देखा, तो उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और दण्डवत् प्रणाम करते हुए भूमि पर गिर पड़े।
When Nityananda saw the Lord's form consisting of innumerable universes, he closed his eyes and fell on the ground in obeisance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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