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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 54
श्लोक
2.24.54
এই রূপ দেখিতে অন্যের শক্তি নাই
প্রভুর কৃপাতে দেখে আচার্য-গোসাঞি
एइ रूप देखिते अन्येर शक्ति नाइ
प्रभुर कृपाते देखे आचार्य-गोसाञि
अनुवाद
भगवान के इस रूप को देखने की शक्ति अन्य किसी में नहीं है। भगवान की कृपा से अद्वैत आचार्य इसे देख पाए।
No one else has the power to see this form of the Lord. By the grace of the Lord, Advaita Acharya was able to see it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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