vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
»
श्लोक 42
श्लोक
2.24.42
হাসিযাঠাকুর বলে,—“শুনহ আচার্য!
কি তোমার ইচ্ছা, বল কি বা চাহ কার্য?”
हासियाठाकुर बले,—“शुनह आचार्य!
कि तोमार इच्छा, बल कि वा चाह कार्य?”
अनुवाद
भगवान मुस्कुराए और बोले, "सुनो आचार्य! तुम्हारी क्या इच्छा है? बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ?"
The Lord smiled and said, "Listen, Acharya! What is your wish? Tell me, what can I do for you?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×