श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.24.38 
আর্তি-যোগ অদ্বৈতের পুনঃ পুনঃ বাডে
একেশ্বর শ্রীবাস-অঙ্গনে গডিঽ পডে
आर्ति-योग अद्वैतेर पुनः पुनः बाडे
एकेश्वर श्रीवास-अङ्गने गडिऽ पडे
 
 
अनुवाद
जब अद्वैत का विलाप बढ़ता गया, तो वे श्रीवास के आँगन की भूमि पर अकेले लोटने लगे।
 
As Advaita's lamentations increased, he began to roll alone on the floor of Srivasa's courtyard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)