श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.24.31 
প্রভু-সঙ্গে গদাধর থাকেন সর্বথা
অদ্বৈত লৈযা সর্ব বৈষ্ণবের কথা
प्रभु-सङ्गे गदाधर थाकेन सर्वथा
अद्वैत लैया सर्व वैष्णवेर कथा
 
 
अनुवाद
गदाधर सदैव भगवान की संगति में रहते थे, जबकि वैष्णव अद्वैत की संगति में रहते थे।
 
Gadadhara always lived in the company of the Lord, while Vaishnavas lived in the company of Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)