श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.24.26 
যে আবেশ দেখিতে ব্রহ্মার অভিলাষ
সুখে তাহা দেখে যত বৈষ্ণবের দাস
ये आवेश देखिते ब्रह्मार अभिलाष
सुखे ताहा देखे यत वैष्णवेर दास
 
 
अनुवाद
वैष्णवों के सेवक उस परमानंद प्रेम को देखकर प्रसन्न हो गए, जिसे ब्रह्मा भी देखना चाहते हैं।
 
The servants of the Vaishnavas were delighted to see that ecstatic love which even Brahma wishes to see.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)