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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 20
श्लोक
2.24.20
ঽগোকুলঽ ঽগোকুলঽ মাত্র বলে ক্ষণে ক্ষণে
ঽবৃন্দাবনঽ ঽবৃন্দাবনঽ বলে কোন-দিনে
ऽगोकुलऽ ऽगोकुलऽ मात्र बले क्षणे क्षणे
ऽवृन्दावनऽ ऽवृन्दावनऽ बले कोन-दिने
अनुवाद
कभी-कभी वे जपते थे, “गोकुल! गोकुल!” और कभी-कभी वे जपते थे, “वृन्दावन! वृन्दावन!”
Sometimes he would chant, “Gokula! Gokul!” and sometimes he would chant, “Vrindavan! Vrindavan!”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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