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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 14
श्लोक
2.24.14
যত সব ভাব হয-অকথ্য সকল
হেন নাহি বুঝি প্রভু কি রসে বিহ্বল
यत सब भाव हय-अकथ्य सकल
हेन नाहि बुझि प्रभु कि रसे विह्वल
अनुवाद
भगवान ने जो सभी भावनाएँ प्रकट कीं, उनका वर्णन करना असंभव है, तथा यह समझना कठिन है कि भगवान किन भावनाओं से अभिभूत थे।
It is impossible to describe all the emotions that the Lord expressed, and it is difficult to understand what emotions overwhelmed the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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