श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.24.12 
শেষে অতি মূর্চ্ছা দেখিঽ মিলিঽ সর্ব দাসে
আলগ করিযা নিযা চলিল আবাসে
शेषे अति मूर्च्छा देखिऽ मिलिऽ सर्व दासे
आलग करिया निया चलिल आवासे
 
 
अनुवाद
जब प्रभु के सेवकों ने देखा कि प्रभु अंततः अचेत हो गये हैं, तो वे उन्हें उनके निवास स्थान पर ले गये।
 
When the Lord's servants saw that the Lord had finally become unconscious, they took Him to His residence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)