श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.24.11 
যে আবেশ দেখিলে ব্রহ্মাদি ধন্য হয
তাহা দেখে নদীযার লোক-সমুচ্চয
ये आवेश देखिले ब्रह्मादि धन्य हय
ताहा देखे नदीयार लोक-समुच्चय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नादिया के लोग परमानंद की ऐसी अभिव्यक्तियाँ देखेंगे जिन्हें देखने की ब्रह्मा जैसे व्यक्तित्वों ने आकांक्षा की थी।
 
Thus the people of Nadia will see such manifestations of bliss that personalities like Brahma aspired to see.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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