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श्लोक 2.23.524  |
চৈতন্যের কৃপায সে নিত্যানন্দ চিনি
নিত্যানন্দ জানাইলে গৌরচন্দ্র জানি |
चैतन्येर कृपाय से नित्यानन्द चिनि
नित्यानन्द जानाइले गौरचन्द्र जानि |
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| अनुवाद |
| भगवान चैतन्य की कृपा से मैं भगवान नित्यानंद को जान गया, और यदि नित्यानंद मुझे गौरचन्द्र का दर्शन करा दें, तो मैं उन्हें जान लूंगा। |
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| By the grace of Lord Caitanya I have come to know Lord Nityananda, and if Nityananda gives me the vision of Gaurachandra, I will know him. |
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