श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  2.23.49-50 
“এই বড ভাগ্য মুঞি যে কিছু দেখিলুঙ্
অপরাধ-অনুরূপ শাস্তি ও পাইলুঙ্
অদ্ভুত দেখিলুঙ্ নৃত্য, অদ্ভুত কীর্তন
অপরাধ-অনুরূপ পাইলুঙ্ তর্জন”
“एइ बड भाग्य मुञि ये किछु देखिलुङ्
अपराध-अनुरूप शास्ति ओ पाइलुङ्
अद्भुत देखिलुङ् नृत्य, अद्भुत कीर्तन
अपराध-अनुरूप पाइलुङ् तर्जन”
 
 
अनुवाद
"मैं सचमुच भाग्यशाली हूँ कि मैंने कुछ देखा। मुझे अपने अपराध के लिए उचित दंड भी मिला है। मैंने वह अद्भुत नृत्य और अद्भुत कीर्तन देखा, और मुझे मेरे अपराध के अनुसार दंड भी मिला।"
 
"I'm really fortunate that I witnessed something. I received the appropriate punishment for my crime. I saw that wonderful dance and that wonderful kirtan, and I received the punishment that was appropriate for my crime."
तात्पर्य
वह ब्राह्मचारी निष्‍काम था। क्‍योंकि उसमें सेवा भाव नहीं था इसलिये ईश्‍वर प्रेम में मस्‍ती करने वालों की नशाभरी लीलाओं को वह पसंद नहीं करता था। यही उसके अपराध का कारण था। आजकल संसार में जो लोग भौतिक भोगों में मदोन्‍मत्‍त होकर नाचने और रोने को परमात्‍मा के परम भक्‍तों के नाचने, रोने और हंसने के समान समझते हैं, अपराधी हैं। उस निष्‍काम ब्रह्‍मचारी ने श्री गौरसुन्‍दर जी की डांट की सजा पाकर ज्ञान प्राप्‍त कर लिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)