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श्लोक 2.23.484  |
ইচ্ছা-মাত্র কোটি কোটি সমৃদ্ধ হৈল
কত কোটি মহাদীপ জ্বলিতে লাগিল |
इच्छा-मात्र कोटि कोटि समृद्ध हैल
कत कोटि महादीप ज्वलिते लागिल |
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| अनुवाद |
| केवल उनकी इच्छा से ही लाखों लोग लाखों बड़ी जलती हुई मशालों के साथ एकत्रित हुए। |
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| Only by his will, millions of people gathered with millions of big burning torches. |
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