এই ব্যাখ্যা করে ভাষ্যকারের সমাজে
মুক্ত-সব লীলা-তনু করিঽ কৃষ্ণ ভজে
एइ व्याख्या करे भाष्यकारेर समाजे
मुक्त-सब लीला-तनु करिऽ कृष्ण भजे
अनुवाद
शास्त्रों पर टिप्पणी करने वालों का स्पष्टीकरण यह है कि मुक्त आत्माएँ भगवान की लीलाओं के लिए उपयुक्त शरीर स्वीकार करती हैं और कृष्ण की पूजा में लग जाती हैं।
The explanation of the commentators on the scriptures is that the liberated souls accept bodies suitable for the pastimes of the Lord and engage in the worship of Krishna.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवतम् 10.87.21 के अपने विवरण में श्रीधर स्वामी सर्वाज्ञ (विष्णुस्वामी) को इस प्रकार उद्धृत करते हैं: [अगला पद]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥