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श्लोक 2.23.471  |
তবে হয মুক্ত—সর্ব-বন্ধের বিনাশ
মুক্ত হৈলে হয, সেই গোবিন্দের দাস |
तबे हय मुक्त—सर्व-बन्धेर विनाश
मुक्त हैले हय, सेइ गोविन्देर दास |
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| अनुवाद |
| तब वह सभी बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। इस प्रकार मुक्त होने पर वह गोविंद का दास बन जाता है। |
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| Then he is liberated from all bondages and attains salvation. Thus liberated, he becomes a servant of Govinda. |
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