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श्लोक 2.23.444  |
আজি মোর ভক্তি হৈল কৃষ্ণের চরণে
শ্রীধরের জল পান করিলোঙ্ যখনে |
आजि मोर भक्ति हैल कृष्णेर चरणे
श्रीधरेर जल पान करिलोङ् यखने |
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| अनुवाद |
| “आज श्रीधर का जल पीकर मुझे कृष्ण के चरणकमलों में भक्ति प्राप्त हुई है। |
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| “Today, after drinking the water of Sridhar, I have attained devotion towards the lotus feet of Krishna. |
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