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श्लोक 2.23.44  |
সন্ন্যাসী ও মোর যদি না লয শরণ
সেহ মোর নহে, সত্য বলিলুঙ্ বচন |
सन्न्यासी ओ मोर यदि ना लय शरण
सेह मोर नहे, सत्य बलिलुङ् वचन |
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| अनुवाद |
| "यदि संन्यासी भी मेरी शरण में नहीं आता, तो वह मेरा नहीं है। यह सत्य मैं तुमसे कह रहा हूँ।" |
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| "If even a Sanyasi does not surrender to me, he is not mine. I am telling you this truth." |
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