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श्लोक 2.23.350  |
সে কমল-নযনে বা কত আছে জল
কতেক বা ধারা বহে পরম নির্মল |
से कमल-नयने वा कत आछे जल
कतेक वा धारा वहे परम निर्मल |
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| अनुवाद |
| कौन जानता है कि भगवान के कमल-नेत्रों से कितनी धाराओं में कितना निर्मल जल बहता था? |
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| Who knows how many streams of pure water flowed from the Lord's lotus eyes? |
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