श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.23.33 
অশ্রু, কম্প, লোম-হর্ষ, সঘন-হুঙ্কার
কে কহিতে পারে বিশ্বম্ভরের বিকার?
अश्रु, कम्प, लोम-हर्ष, सघन-हुङ्कार
के कहिते पारे विश्वम्भरेर विकार?
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर के प्रेम के उन्मत्त रूपान्तरणों का वर्णन कौन कर सकता है, जैसे आँसू बहना, काँपना, रोंगटे खड़े हो जाना, तथा जोर से गर्जना करना?
 
Who can describe the frenzied transformations of Vishvambhara's love, such as tears flowing, trembling, goosebumps, and loud roaring?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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