श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 261
 
 
श्लोक  2.23.261 
সুন্দর নাসাতে বহে অবিরত ধার
অতি ক্ষীণ দেখি যেন মুকুতার হার
सुन्दर नासाते वहे अविरत धार
अति क्षीण देखि येन मुकुतार हार
 
 
अनुवाद
उनकी नाक से लगातार बह रही तरल की पतली धारा मोतियों की एक छोटी माला की तरह लग रही थी।
 
The thin stream of liquid continuously flowing from his nose looked like a small string of pearls.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)