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श्लोक 2.23.260  |
মন্দাকিনী-হেন প্রেম-ধারার গমন
চান্দেরে না লয মন দেখিঽ সে বদন |
मन्दाकिनी-हेन प्रेम-धारार गमन
चान्देरे ना लय मन देखिऽ से वदन |
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| अनुवाद |
| उनके नेत्रों से प्रेमाश्रु गंगा की धारा के समान बह रहे थे। उनके मुख को देखने वालों का मन अब चन्द्रमा की ओर आकर्षित नहीं हो रहा था। |
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| Tears of love flowed from his eyes like the Ganges. Those who gazed upon his face were no longer drawn to the moon. |
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