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श्लोक 2.23.236  |
যে সুখে বিহ্বল অজ, অনন্ত, শঙ্কর
হেন-রসে ভাসে সর্ব-নদীযা-নগর |
ये सुखे विह्वल अज, अनन्त, शङ्कर
हेन-रसे भासे सर्व-नदीया-नगर |
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| अनुवाद |
| समस्त नाडिया उस परमानंद की मधुरता में तैर रही थी जो ब्रह्मा, अनंत और शिव को अभिभूत कर देता है। |
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| All the Nadis were floating in the sweetness of that ecstasy which overwhelms Brahma, Ananta and Shiva. |
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