श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  2.23.201 
সে-ই প্রভু নাচে নিজ-কীর্তনে বিহ্বল
আপনেই উপসন্ন সকল মঙ্গল
से-इ प्रभु नाचे निज-कीर्तने विह्वल
आपनेइ उपसन्न सकल मङ्गल
 
 
अनुवाद
वही भगवान अब अपने कीर्तन में लीन हो गये और समस्त शुभताएं स्वतः ही प्रकट हो गयीं।
 
The same Lord now became absorbed in his kirtan and all auspiciousness manifested automatically.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)