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श्लोक 2.23.127  |
অনন্ত ব্রহ্মাণ্ড মোর সেবকের দাস
মুঞি বিদ্যমানে ও কি ভযের প্রকাশ |
अनन्त ब्रह्माण्ड मोर सेवकेर दास
मुञि विद्यमाने ओ कि भयेर प्रकाश |
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| अनुवाद |
| "असंख्य ब्रह्माण्ड मेरे सेवकों के सेवक हैं। जब मैं स्वयं उपस्थित हूँ तो कौन सा भय प्रकट हो सकता है? |
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| "The countless universes are servants of My servants. What fear can arise when I Myself am present? |
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