जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य गुण-निधि
जय विश्वम्भर जय भवादिर विधि
अनुवाद
दिव्य गुणों के सागर, चैतन्य भगवान श्री कृष्ण की जय हो! शिव जैसे व्यक्तित्वों के नियंत्रक, विश्वम्भर की जय हो!
All hail the living Lord Shri Krishna, the ocean of transcendental qualities! All hail Vishvambhar, the controller of Shiva-like personalities!
तात्पर्य
भावति विधि पद का अर्थ निन्मलिखित है : भगवान शिवजी एव ब्रह्माजी इन गुणावतारो के नित्य स्वामी है । नित्यत्व के दो पक्ष है सृष्टि एव प्रलय । नित्य और अनित्य दोनों प्रकार के स्वामी परमेश्वर है इस से शिवजी आदि के भी स्वामी है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥