vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
»
श्लोक 98
श्लोक
2.22.98
মোহিত হৈযা চাহে অদ্বৈত আচার্য
সেই মুখ চাহে সব পরিহরিঽ কার্য
मोहित हैया चाहे अद्वैत आचार्य
सेइ मुख चाहे सब परिहरिऽ कार्य
अनुवाद
अद्वैत आचार्य भगवान के मुख को देखते ही सब कुछ भूल गए और आश्चर्यचकित हो गए।
Advaita Acharya forgot everything and was astonished as soon as he saw the face of God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×