श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.22.95 
বসিযাছে অদ্বৈত বেডিযা ভক্ত-গণ
শ্রীবাসাদি করিযা যতেক মহাজন
वसियाछे अद्वैत वेडिया भक्त-गण
श्रीवासादि करिया यतेक महाजन
 
 
अनुवाद
वहाँ अद्वैत भगवान श्रीवास आदि महान भक्तों के बीच बैठे थे।
 
There Advaita Lord Srivasa and other great devotees were sitting among them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)