श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.22.91 
নিরবধি থাকে প্রভু অদ্বৈতের সঙ্গে
বিশ্বরূপ-সহিত অদ্বৈত রস-রঙ্গে
निरवधि थाके प्रभु अद्वैतेर सङ्गे
विश्वरूप-सहित अद्वैत रस-रङ्गे
 
 
अनुवाद
विश्वरूप निरन्तर अद्वैत की संगति में रहते थे और वे दोनों परमानंद प्रेम के रस का आनन्द लेते थे।
 
Vishwaroopa was constantly in the company of Advaita and they both enjoyed the nectar of ecstatic love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)