केवल सिंह सदृश अद्वैत ने ही, कृष्ण की पूर्ण शक्तियों से संपन्न होकर, योग-वशिष्ठ को शिक्षा देते हुए कृष्ण भक्ति की व्याख्या की।
Only the lion-like Advaita, endowed with the full powers of Krishna, explained Krishna devotion while teaching Yoga-Vasishtha.
तात्पर्य
अद्वैत प्रभुजी योग-वाशिष्ठ की व्याख्या करते हुए कृष्ण भक्ति का वर्णन करते थे। चूंकि उनमें कृष्ण की संपूर्ण शक्तियां थीं, इसलिए उन्हें वैष्णवाग्रणी अर्थात सर्वोच्च वैष्णव कहा जाता था। महाप्रभु के बड़े भाई विश्वरूप हरि के विषयों को कहीं भी न सुन पाने के कारण विशेष दुखी थे। इसलिए अद्वैत प्रभु की संगति प्राप्त करने पर उन्हें बहुत अधिक आनंद हुआ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥