श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.22.87 
সর্ব-স্থানে বিশ্বরূপ ঠাকুর বেডায
ভক্তি-যোগ নাশুনিযা বড দুঃখ পায
सर्व-स्थाने विश्वरूप ठाकुर वेडाय
भक्ति-योग नाशुनिया बड दुःख पाय
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वरूप इधर-उधर भटकते हुए दुःखी हो गए, क्योंकि उन्होंने भगवान की भक्ति के विषय में कुछ भी नहीं सुना था।
 
Lord Viśvarūpa became sad while wandering here and there, because he had not heard anything about devotion to the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)