श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.22.82 
হেন মতে নবদ্বীপে বৈসে বিশ্বরূপ
ভক্তি-শূন্য লোক দেখিঽ না পায কৌতুক
हेन मते नवद्वीपे वैसे विश्वरूप
भक्ति-शून्य लोक देखिऽ ना पाय कौतुक
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विश्वरूप नवद्वीप में निवास करते थे, फिर भी वे यह देखकर प्रसन्न नहीं होते थे कि लोग भक्ति से विहीन हैं।
 
Thus Visvarupa lived in Navadvipa, yet he was not pleased to see that the people were devoid of devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)