श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.22.79 
যত বাখানিল, সব করিল খণ্ডন
বিস্ময সবার চিত্তে হৈল তখন
यत वाखानिल, सब करिल खण्डन
विस्मय सबार चित्ते हैल तखन
 
 
अनुवाद
फिर जब उन्होंने जो कुछ स्थापित किया था, उसका खंडन किया, तो सबके हृदय आश्चर्य से भर गये।
 
Then when he refuted what had been established, everyone's hearts were filled with astonishment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)