श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.22.73 
পুনঃ বিশ্বরূপ সেই সভা-মাঝে
গিযাভট্টাচার্য-সব প্রতি বলেন হাসিযা
पुनः विश्वरूप सेइ सभा-माझे
गियाभट्टाचार्य-सब प्रति बलेन हासिया
 
 
अनुवाद
इस बीच विश्वरूप सभा में लौट आये और चेहरे पर मुस्कान लिये हुए भट्टाचार्यों से बोले।
 
Meanwhile, Vishwarup returned to the assembly and spoke to Bhattacharyas with a smile on his face.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)