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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 71
श्लोक
2.22.71
তোমারে তঽ সবার হৈল মূর্খ-জ্ঞান
আমারে ও দিলে লাজ করিঽ অপমান”
तोमारे तऽ सबार हैल मूर्ख-ज्ञान
आमारे ओ दिले लाज करिऽ अपमान”
अनुवाद
“सब लोग तुम्हें मूर्ख समझते थे, और तुम्हारे अहंकार ने मुझे लज्जित कर दिया है।”
“Everyone thought you were a fool, and your arrogance has put me to shame.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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