श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.22.70 
“যে পুঙ্থি পডিস্ বেটা, তাহা না বলিযাকি
বোল বলিলি তুই সভা-মাঝে গিযা
“ये पुङ्थि पडिस् बेटा, ताहा ना बलियाकि
बोल बलिलि तुइ सभा-माझे गिया
 
 
अनुवाद
“बेटा, तुम जो पढ़ रहे हो उसे बताने के बजाय तुमने सभा में ऐसा क्यों कहा?
 
“Son, why did you say this in the meeting instead of telling what you are reading?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)