श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.22.68 
শিশু-জ্ঞানে কেহ কিছু না বলিল আর
মিশ্র পাইলেন দুঃখ শুনিঽ অহঙ্কার
शिशु-ज्ञाने केह किछु ना बलिल आर
मिश्र पाइलेन दुःख शुनिऽ अहङ्कार
 
 
अनुवाद
उन्हें बालक समझकर कोई भी आगे नहीं बोला। परन्तु जगन्नाथ मिश्र अपने पुत्र का अहंकारपूर्ण उत्तर सुनकर दुःखी हो गए।
 
Thinking him to be a child, no one spoke further. But Jagannath Mishra was saddened by his son's arrogant reply.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)