श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.22.66 
নিত্যানন্দ-রূপ প্রভু পরম সুন্দর
হরিলেন সর্ব-চিত্ত সর্ব-শক্তি-ধর
नित्यानन्द-रूप प्रभु परम सुन्दर
हरिलेन सर्व-चित्त सर्व-शक्ति-धर
 
 
अनुवाद
उनका नित्य आनन्दमय स्वरूप अत्यंत मनमोहक था। वे सभी के हृदयों को आकर्षित करते थे, क्योंकि उनमें समस्त शक्तियाँ समाहित थीं।
 
His eternally blissful form was extremely captivating. He attracted everyone's hearts because he contained all the powers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)