श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.22.65 
ভট্টাচার্য-সভায চলিলা জগন্নাথ
বিশ্বরূপ দেখিঽ বড কৌতুক সভাঽত
भट्टाचार्य-सभाय चलिला जगन्नाथ
विश्वरूप देखिऽ बड कौतुक सभाऽत
 
 
अनुवाद
जब जगन्नाथ ने भट्टाचार्यों की सभा में प्रवेश किया, तो वहाँ उपस्थित सभी लोग विश्वरूप को देखकर प्रसन्न हो गये।
 
When Jagannatha entered the assembly of Bhattacharyas, everyone present there was delighted to see Visvarupa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)