श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.22.63 
তান ব্যাখ্যা বুঝে, হেন নাহি নবদ্বীপে
শিশু-ভাবে থাকে প্রভু বালক-সমীপে
तान व्याख्या बुझे, हेन नाहि नवद्वीपे
शिशु-भावे थाके प्रभु बालक-समीपे
 
 
अनुवाद
नवद्वीप में कोई भी उनकी व्याख्या को समझने में सक्षम नहीं था, फिर भी वे एक बच्चे की तरह रहते थे और युवा लड़कों के साथ संगति करते थे।
 
No one in Navadvipa was able to understand his explanation, yet he lived like a child and kept company with young boys.
तात्पर्य
नवद्वीप का कोई भी विद्वान विश्वरूप के स्पष्टीकरण का अर्थ समझने में सक्षम नहीं था। सामान्य लड़के की तरह, विश्वरूप एक बच्चे के मनोभाव में स्थित थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)