श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.22.61 
প্রভুর অগ্রজ—বিশ্বরূপ মহাশয
ভুবন-দুর্লভ-রূপ, মহা-তেজোময
प्रभुर अग्रज—विश्वरूप महाशय
भुवन-दुर्लभ-रूप, महा-तेजोमय
 
 
अनुवाद
विश्वरूप महाशय भगवान के बड़े भाई थे। उनका अत्यंत तेजस्वी रूप इस जगत में अद्वितीय था।
 
Vishwarupa Mahasaya was the Lord's elder brother. His extremely radiant form was unparalleled in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)